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पहचाने अपने हाथों की रेखाओ को

07-01-2016 Page : 2 / 2

पहचाने अपने हाथों की रेखाओ को

6.    बुध रेखा : बुध रेखा को स्वास्थ्य रेखा के नाम से भी जाना जाता है। यह कनिष्ठा अंगुली के नीचे जाकर समाप्त होती है। ज्यादातर यह मस्तिष्क रेखा व हृदय रेखा को काटती हुई कनिष्ठा के नीचे पहुंचती है। यह रेखा प्राय: उपस्थित नहीं होती है। यदि उपस्थित हो तो इसका निरापद होना ही ठीक है। इस रेखा से स्वास्थ्य, विज्ञान में रुचि, व्यापार इत्यादि का विचार किया जाता है।
7.    विवाह या अनुराग रेखा : हृदय रेखा से ऊपर व कनिष्ठा मूल के बीच पाई जाने वाली आड़ी रेखा को अनुराग रेखा या विवाह रेखा कहते हैं। यह एक से अधिक भी हो सकती है, जो सर्वाधिक गहरी, अच्छी हो वही विवाह रेखा गिनी जाएगी अन्यथा केवल लगाव या विपरीत लिंगी का प्रभाव बताएगी। रेखा की स्थितियों के अनुसार ही विवाह विच्छेद या जीवन साथी से अलगाव यहां से देखा जाता है।
8.    पूर्वाभास रेखा : यह रेखा चन्द्र पर्वत पर अद्र्ध चन्द्राकार रूप में पाई जाती है। यह बहुत कम हाथों में ही दृष्टिगोचर होती है तथा अपने नाम के अनुरूप ही फल प्रदान करती है। अर्थात जातक को आगामी घटनाओं का आभास हो जाता है।
9.    वलय : दो या तीन अंगुलियों को घेरकर बनने वाली अद्र्धवृत्त आकृति को वलय कहते हैं। इनका होना अच्छा नहीं माना गया है। जैसे शुक्र वलय, गुरू वलय इत्यादि।
10.    मणिबंध : हथेली के समाप्ति स्थल पर जहां कलाई व हथेली का जोड़ होता है। दो-तीन जंजीरनुमा आड़ी रेखाएं (कंकण डोरा जैसी) पाई जाती है, उन्हें मणिबंध कहते हैं। अनेक विद्वान इससे आयु का अनुमान लगाते हैं।

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