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वास्तु के ये दोष है भानगढ़ महल में।

18-10-2016 Page : 1 / 1

वास्तु के ये दोष है भानगढ़ महल में।

आमेर बसने से पहले जयपुर के राजाओं ने यह महल बनवाया था। इन प्राचीन किस्सों के चलते वो लोग यहाँ से आमेर गए, या कोई भौगोलिक असुविधा हुई, सही कारण ज्ञात नहीं है। परंतु महलों का जो निर्माण किया गया था वह बड़ा भव्य है तथा ऊपर महल तथा पहाड़ी के नीचे नगर योजना किसी महत्वाकांक्षी राजधानी की स्थापना का संकेत देता है। मैंने पहले तो पहाड़ी पर चढ़कर महल व नगर का एक विहंगावलोकन किया और इस नगरी के उजड़ जाने के क्या कारण हो सकते हैं? इस पर विचार किया। निश्चित ही नगर निर्माण में वास्तुशास्त्रीय नियमों का साधारण सा पालन किया गया था। परन्तु बड़े वास्तु दोष वहाँ उपलब्ध थे। यदि समरांगण सूत्रधार (राजा भोजदेव की रचना) के आधार पर नगर निर्माण की योजना को परखें तो भानगढ़ में बहुत सारे दोष नजर आते हैं। जिनमें सबसे प्रमुख पश्चिम में तो पहाड़ी का होना है परंतु महल के दक्षिण में स्थित पहाड़ी छोटी है इसके अतिरिक्त नगर के मध्य भाग से एक नाला उतरता है तथा महल और नगर के संधि स्थल से एक अन्य नाला समकोण बनाते हुए पूर्व से पश्चिम की ओर ढलान बनाते हुए गुजरता है।

महल रचनाएं उत्तरमुखी होते हुये भी ब्रह्मस्थान को सुरक्षित नहीं रखा गया है। जिसकी वजह से उसमें बड़े दोष आ गए हैं। नीचे नगर के बीचों-बीच स्थित बाजार महलों के मुख्य द्वार से प्रारम्भ होकर नगर के ईशान कोण में जाकर समाप्त होते हैं। उत्तर दिशा की ओर से नगर में प्रवेश करते ही बाजारों के पिछवाड़े में आज भी एक खंडहर ऐसा है जिस पर वेश्या शब्द उत्कीर्ण है। ऐसा प्रतीत होता है कि राजनर्तकी या वेश्या अधिकृत रूप से नगर में रहती थी। सम्भव है प्राचीन गणतंत्रों की भाँति (जैसे लिच्छवि गणराज्य) यहाँ भी राजनर्तकी राजपुत्रों को शिक्षा देती हो। राजमहलों के परकोटे में अन्दर प्रवेश करते ही राजपुरोहित भी राजा द्वारा दिए हुए महलों में रहते थे।

महलों के अवलोकन के बाद गोधू पटेल व कैलाश से वार्ता करते-करते हम बाहर नगर की ओर आ रहे थे। मेरी ज्यादा जिज्ञासा इस बात में थी कि क्या जिन्नों का कोई अस्तित्व है? पद्मा शर्मा (प्रकाशक, ज्योतिष मंथन) तो महल के कल्पित वातावरण की कल्पना मात्र से रोमांचित थीं और मैं एक राजधानी के नष्ट होने के यथार्थ कारण को जान लेने की जिज्ञासा में था कि अचानक बाजार (पत्थरों से निर्मित सैंकड़ों दुकानें आज भी मौजूद हैं परन्तु सब की छत गिर चुकी है।) में प्रवेश करते ही एक व्यक्ति दिखा जिसे भीड़ घेरे हुए थी तथा वह जिज्ञासुओं के प्रश्नों का जवाब दे रहा था।

गोधू पटेल ने आश्चर्य मिश्रित वाणी में मुझसे कहा कि आप किस्मत वाले हैं। यह व्यक्ति कभी-कभार ही यहाँ आता है। यह जयपुर जिले की बस्सी तहसील के खसनपुरा गाँव का बाबूलाल मीणा है। इसमें कभी-कभी जिन्न आता है। जब कभी ऐसा होता है तो यह बेबस सा होकर सीधे भानगढ़ की ओर जाता है। जब तो जैसे आस-पास के लोगों को मालूम चलता है कि इसमें जिन्न आ गया है वे लोग गाड़ी-घोड़े करके बाबूलाल मीणा को बैठाकर इस भानगढ़ में ले आते हैं। फिर सवामणी जैसा कोई आयोजन कर लेते हैं और बाबूलाल से प्रश्न पूछकर अपनी जिज्ञासाओं को शान्त करते हैं। बाबूलाल इस कार्य के कोई पैसे नहीं लेता। गोधू पटेल ने बताया कि कभी-कभी चमत्कार प्रदर्शन भी कर देता है। गोधू को तीन मौकों पर उसने एक-एक रुपया हवा में हाथ लहराकर बंद मुठ्ठी में से निकालकर दिया। जो उसके पास आज भी मौजूद हैं। सरपंच रामजीलाल ने बताया कि उसने कई बार विदेशी सिगरेट चांसलर हवा से निकालकर दी। चांसलर सिगरेट वहाँ आस-पास कहीं नहीं मिलती। यह एक रहस्य है कि वह जिन्न अपने के बाद भानगढ़ ही क्यों आता है। रुपए वह कमाता नहीं इसलिए ढोंग की संभावना प्रतीत नहीं होती।

ऐसा प्रतीत होता है कि जयपुर के वर्तमान शासकों के पूर्वज अतिमहत्वाकांक्षी थे। अत: भानगढ़ भौगोलिक दृष्टि से अधिक सुरक्षित न होने के कारण उन्होंने आमेर बसने की सोची। करीब बारहवीं शताब्दी में वे आमेर के मीणा शासकों से राज्य छीनने में सफल भी रहे परंतु रत्नावती से जुड़ी परम्पराएं और उसका सत्यव्रती होना आज भी जनमानस में व्याप्त है। यही कारण है कि महलों के पिछवाड़े में स्थित थान में आज भी वर्ष में एक बार मेला भरता है व लोग उसमें मनौती माँगने आते हैं।


- पं. सतीश शर्मा, प्रधान संपादक, ज्योतिष मंथन
18-10-2016

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