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वर वधु गुण मेलापक विधान।

15-10-2016 Page : 1 / 1

वर वधु गुण मेलापक विधान।

भारत में परिवार सुरक्षित है इसका एक बहुत बड़ा कारण प्राचीन भारतीय मेलापक पद्धति है। पश्चिमी देशों में परिवार का पतन हो गया है, समाज असुरक्षित हो गया है, परिवार और समाज में परस्पर सुरक्षा की भावना का अभाव हो गया है। अमेरिका जैसे देश में इन दो इकाईयों का पतन होने के बाद केवल राष्ट्र सुरक्षित है, परन्तु भारत में परिवार भी सुरक्षित है, समाज भी सुरक्षित है और व्यक्ति समाज का डर मानता है। हमारा राष्ट्र और संस्कृति अक्षुण्ण रहेंगे, ऐसा आश्वासन परिवार प्रणाली के सुरक्षित रहने से हम प्राप्त कर सकते हैं।

प्राचीन मेलापन पद्धति
ज्योतिष छ: वेदांगों में से एक है। वेदांगों के रचनाकाल तक यह तय हो चुका था कि पारिवारिक इकाई सुदृढ हो तथा समाज भी इतना शक्तिशाली हो कि व्यक्ति या परिवार उसका सम्मान करें तो देश में धर्म या कानून का शासन करना और आसान हो जाएगा। ऐसा करने के लिए दो व्यक्तियों के बीच में जिस मतैक्य की आश्यकता थी उसे प्राप्त करने के लिए जिस पद्धति का प्राचीन ऋषियों ने आविष्कार किया वह वैदिक ज्योतिष पर आधारित विवाह मेलापक पद्धति है। इसका मुख्य आधार दो व्यक्तियों के जन्म नक्षत्र पर आधारित एक तुलनात्मक विवरण है, जिसमेें कुल मिलाकर 36 पूर्णांक है तथा 18 या कुछ अंक मिलने पर मध्यम मेलापक माना जाता है तथा 24 या अधिक अंक मिलने पर उत्तम मेलापक माना जाता है।  कालांतर में दो व्यावसायिक भागीदारों के बीच में भी इस मेलापक का प्रयोग किया जाने लगा।

ऋषियों ने अपने अनुभव से यह तय किया कि पुरुष और स्त्री के नक्षत्रों में कुछ नक्षत्र तो एक-दूसरे को बहुत अधिक सहयोग करते हैं और कुछ नक्षत्र एक-दूसरे को बिल्कुल सहयोग नहीं करते। गुण-मिलान की पद्धति का मुख्य आधार नक्षत्रों की परस्पर शत्रुता या मित्रता है। उदाहरण के लिए यदि पुरुष का अश्विनी नक्षत्र हो और स्त्री का भरणी नक्षत्र हो तो 34 गुण मिलते हैं। इसी भांति उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र का पुरुष हो और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र की स्त्री हो तो 35 गुण मिलते है। हस्त नक्षत्र का पुरुष हो और मृगशिरा नक्षत्र के अंतिम चरणों में स्त्री का जन्म हुआ हो तो 34 गुण मिलते है। दूसरी तरफ उत्तराषाढ में पुरुष हो और मघा में स्त्री का जन्म हो तो साढ़े तीन गुण मिलते है। चित्रा नक्षत्र में पुरुष का जन्म हो और भरणी नक्षत्र में स्त्री का जन्म हो तो केवल 4 गुण मिलते हैं।


प्राचीन भारतीय आचार्यों ने सांख्यिकीय आधार पर अनुसंधान करके एक ऐसी सारिणी का आविष्कार कर लिया था, जिसमें एक व्यक्ति के नक्षत्र का दूसरे जातक के जन्म नक्षत्र से मिलान करने के लिए सामग्री उपलब्ध थी। आज यह सारणी हर पंचाङ्ग में उपलब्ध रहती है। भारतीय ज्योतिष में शामिल किए गए सभी नक्षत्रों की परस्पर मेलापक सारिणी आज सहज उपलब्ध है। परन्तु स्त्री-पुरुष के विवाह के पश्चात  उनका वैवाहिक जीवन सफल सिद्ध हो इसके लिए केवल नक्षत्रों के आधार पर मेलापन पर्याप्त नहीं है, उसमें कुछ और तथ्यों का समावेश और परीक्षण किया जाना आवश्यक है।

खोजे अपना मनमीत
- पं. श्रीराम शर्मा - 15-10-2016

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