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प्रश्न द्वारा वर्षा विचार।

29-06-2016 Page : 1 / 1

प्रश्न द्वारा वर्षा विचार।

जब प्रश्नकर्ता वर्षा का प्रश्र कृष्णपक्ष में करे तब चन्द्रमा लग्र में जल राशि में स्थित हो। यदि प्रश्रकर्ता शुक्ल पक्ष में प्रश्र करें और चन्द्रमा जल राशि में स्थित होकर लग्र से केन्द्र में बैठे हों। उपरोक्त दोनों मामलों चन्द्रमा शुभ ग्रह से दृष्ट हो तो उत्तम वर्षा और पाप ग्रह से दृष्ट होने की दशा में अल्प वर्षा होती है।

प्रश्रकर्ता प्रश्र करते समय जल, गीली वस्तु या जल संज्ञक वस्तु को स्पर्श करें या जल के पास स्थित हो, जलसम्बन्धी किसी कार्य में संलग्र हो या किसी दूसरे के द्वारा जल शब्द सुनने में आवे तो प्रश्र सिद्घि के योग होते हैं।

नक्षत्र है महत्वपूर्ण

  • स्त्री नक्षत्र : आद्र्रा, पुनर्वसु पुष्य, आश्लेषा, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तराफाल्गुनी, हस्त, चित्रा और स्वाति।
  • पुरुष नक्षत्र : मूल, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तराभाद्रपद, रेवती, अश्विनी, भरणी, कृतिका, रोहिणी व मृगशिरा।
  • नपुंसक नक्षत्र : विशाखा, अनुराधा व ज्येष्ठा।

उपरोक्त नक्षत्र संज्ञा में वर्षाकाल के दौरान सूर्य और चन्द्र की स्थिति से वर्षा विचार किया जाता है। इनकी स्थिति क्रमश: पुरुष व स्त्री हो तो वर्षा, स्त्री व पुरुष हो तो अधिक वर्षा स्त्री व नपुसंक हो तो कम वर्षा, स्त्री व स्त्री या पुरुष व पुरुष हो तो बादल छाये रहने तथा नपुसंक व नपुंसक हो तो अनावृष्टि समझना चाहिए।

- ज्योतिष मंथन, 29-06-2016

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