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संतानहीनो के लिए वरदान ये उपाय

23-07-2016 Page : 1 / 1

संतानहीनो के लिए वरदान ये उपाय

पूर्वजन्म के संचित कर्मों के कारण मानव को सांसारिक परिवेश में पुत्र अभाव का कष्ट भोगना पड़ता है जो प्रभु की कृपा व प्रभु साधना के द्वारा सुखानुभूति में परिवर्तित हो जाता है। जिसके लिये दम्पत्ति को प्रभु-साधना में ध्यान लगाना चाहिये क्योंकि प्रभु साधना के माध्यम से पूर्व जन्म के संचित पाप नष्ट हो जाते हैं और तात्कालिक-जीवन में अभावमय भाव की उपलब्धि के कारण सुखानुभूति होने लगती है। दाम्पत्य जीवन में पुत्र का अभाव बहुत निराशा का भाव होता है। भगवान की सकाम साधना करने के फलस्वरूप उनको पुत्र रत्न की प्राप्ति का सौभाग्य प्राप्त हुआ जो उनके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि का लक्ष्य रहा है।

संतान प्राप्ति के अचूक उपाय
प्रयोग 1.    जो दम्पत्ति संतान अभाव से पीडि़त है वे नियमित रूप से प्रात:काल में स्नानादि के बाद भगवान राम की षोडशोपचार पूजा करके निम्र चौपाई का पाठ या जाप एक सौ आठ बार नियमित रूप से नौ माह तक करें। भगवान राम और माता कौशल्या की कृपा से फल की प्राप्ति होगी।

प्रेम मगन कौशल्या निस दिन जात न जान।
सुत सनेह बस माता बाल चरित कर गान॥


प्रयोग 2.    प्रात: काल स्नानादि से निवृत्त होकर भगवान राम और माता कौशल्या की षोडशोपचार विधि से पूजा करके नियमित रूप से तीन माह तक प्रतिदिन बालकाण्ड के दोहा नं. 198 से दोहा नं. 149 तक उल्टा पाठ करें, प्रभु की कृपा से फल की प्राप्ति होगी।

प्रयोग : 3. प्रात: तथा संध्या काल में स्नानादि के बाद भगवान कृष्ण (बालरूप) की षोडशोपचार पूजा करने के बाद तुलसी की माला से प्रति दिन 21 माला (प्रात: व संध्या) को निम्र मंत्रों का जाप करें। पूजा स्थान में बालरूप कृष्ण माखन खाते हुये का चित्र रखें और दूसरा चित्र अपने शयनकक्ष में मुख के सामने रहे, इस प्रकार रखकर कृष्ण का अधिक से अधिक ध्यान व स्मरण करने से फल की प्राप्ति होगी।

मंत्र : देवकी सुत गोविन्द, वासुदेव जगत्पते।
       देहि में तनयं, कृष्ण त्वामहं शरणं गत:॥


अथवा : ॐ नमो भगवते जगत्प्रसूतये नम:॥

उक्त साधना के माध्यम से अनेकों भक्तों ने लाभ उठाया है और कुछ भक्त प्रयासशील है। प्रभु की कृपा किस व्यक्ति पर कब हो जाये, इस भाव को तो प्रभु ही जाने क्योंकि प्रभु भाव के भूखे हैं, जो भक्त प्रभु साधना को पूर्ण श्रद्धा भाव से तन्मय होकर करते हैं। उतने शीघ्र ही प्रभु प्रसन्न होते हैं और मनोकामना को पूर्ण करते हैं। मेरी मान्यता है कि एक मानव जब किसी दूसरे मानव की पूर्ण आस्था के साथ सेवा करता है तो मानव-मानव की सेवा से प्रसन्नचित हो जाता है और उसका सहायक सिद्ध हो जाता है तो वह प्रभु मानव की सेवा-पूजा से प्रसन्नचित क्यों नहीं होगा अर्थात वह अवश्य प्रसन्नचित होगा और मनोवांछित फल अवश्य देगा।

- ज्योतिष मंथन, 24-07-2016

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