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क्यों आती है धनतेरस को सम्पन्नता ?

16-10-2017 Page : 1 / 1

क्यों आती है धनतेरस को सम्पन्नता ?<br>

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी `धनतेरस` कहलाती है। भगवान धनवंतरि समुद्र मंथन से हाथ में अमृत कलश लेकर प्रकट हुये थे। धनवंतरि जी भगवान विष्णु के अंशावतार हैं, भगवान विष्णु ने चिकित्सा विज्ञान को विस्तार देने के लिये धनवंतरि जी के रूप में अवतार लिया। धनवंतरि जी देवताओं के वैद्य हैं। इस दिन भगवान विष्णु ने वामन अवतार भी लिया था। शास्त्रों के अनुसार राजा बलि द्वारा सभी देवता परेशान व भयभीत थे।

    राजा बलि ने देवताओं से सब कुछ छीन लिया था। तब भगवान विष्णु ने देवताओं के हित के लिये वामन अवतार लिया और राजा बलि के यज्ञ स्थल पर पहुंच गये। तब राजा बलि ने वामन को देखकर आग्रह कि या कि वे कुछ भी मांगे, तब ही असुरों के गुरु शुक्राचार्य ने वामन के रूप में भगवान विष्णु को पहचान लिया और राजा बलि से कुछ न देने को कहा परंतु राजा बलि ने शुक्राचार्य की बात न मानकर पुन: आग्रह किया कि वे कुछ मांगे। तब वामन भगवान ने राजा बलि से तीन पग भूमि मांगी। इस पर गुरु शुक्राचार्य उन्हें रोकने के लिये राजा बलि के कमण्डल में लघु रूप धारण करके प्रवेश कर गये। जिससे कमण्डल के जल का मार्ग बंद हो गया।

         भगवान वामन गुरु शुक्रचार्य की इस चाल को समझ गये और उन्होंने अपने हाथ से कुशा को कमण्डल में ऐसे रखा कि शुक्राचार्य जी की एक आंख फूट गई और वह कमण्डल से बाहर आ गये। तब राजा बलि ने वामन देव को तीन पग भूमि का संकल्प दिया। भगवान वामन ने एक पग में सम्पूर्ण पृथ्वी को नाम लिया, दूसरे पग में अंतरिक्ष को व तीसरे पग को रखने के लिये राजा बलि से पूछा तब राजा बलि सिर आगे करते हुये कहा कि तीसरा पग आप मेरे सिर पर रखें प्रभु, मैं अपना सब कुछ गंवा बैठा हूं, इस पर वामन देव ने राजा बलि के सिर पर अपना तीसरा पग रखा। इस तरह राजा बलि से सभी देवताओं को मुक्त किया व जो भी देवताओं छीन लिया था व कई गुणा होकर सभी देवताओं को पुन: प्राप्त हुआ।

    इसलिये इस दिन भगवान विष्णु व मां लक्ष्मी की पूजा  की जाती है ताकि जिस प्रकार देवताओं को पुन: समस्त ऐश्वर्य की प्राप्ति हुई उसी प्रकार हमें भी कई गुणा फलों की प्राप्ति हो।

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