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दिवाली से एक दिन पहले करें ये उपाय तो होगा असाध्य रोगों का नाश।

16-10-2017 Page : 1 / 1

दिवाली से एक दिन पहले करें ये उपाय तो होगा असाध्य रोगों का नाश।

दीपावली के एक दिन पहले रूप चतुर्दशी मनायी जाती है। इस दिन हम नरक चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है। शास्त्रों के अनुसार इसी दिन श्री कृष्ण ने एक दैत्य नरकासुर के बंदी गृह से स्त्रियों को  मुक्त किया था। इस दिन दीपावली व रूप चौदस से भी जानते हैं, रूप चौदस के पीछे भी एक पौराणिक कथा का वर्णन मिलता है।

एक समय भारत वर्ष में हिरण्यगर्भ नामक नगर में एक योगीराज रहते थे।, उन्होंने अपने मन को एकाग्र करके भगवान में लीन होना चाहा अत: उन्होंने समाधि लगा ली। समाधि के कुछ समय बाद ही उनके शरीर में कीड़ें पड़ गये। बालों में आंखों की भौहों पर जुएं पड़ गई। ऐसी दशा के कारण योगीराज बहुत दु:खी रहने लगे। वे  भगवान से बोल रहे थे कि मैंने तो आप में लीन होना चाहा था परंतु मेरी यह दशा क्यों हो गई? उसी समय नारद जी वहां से गुजर रहे थे, उन्होंने योगीराज के वचन सुने और उनके पास जाकर बोले! तुम चिंतन करना जानते हो परंतु देह आचार का पालन नहीं जानते, इसलिये तुम्हारी यह दशा हुई। तब योगीराज ने नारद जी से देह आचार के विषय में पूछा। इस पर नारद जी बोले देह आचार से अब तुम्हें कोई लाभ नहीं है। पहले जो मैं तुम्हें बताता हूं, उसे करना फिर देह आचार के बारे में बताऊंगा।

नारद जी ने योगीराज से कहा - इस बार जब कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी आये तो तुम भगवान विष्णु व श्री कृष्ण की पूजा ध्यान से करना। ऐसा करने से तुम्हारा शरीर पहले जैसा ही स्वस्थ व रूपवान हो जायेगा। योगीराज ने ऐसा ही किया और उनका शरीर पहले जैसा हो गया। उस दिन से इसे रूप चतुर्दशी से भी जाना जाता है। इस दिन प्रात:काल शरीर पर उबटन लगाकर स्नान करना चाहिये। पूजन हेतु एक थाल को सजाकर उसमें एक चौमुख दीप व सोलह छोटे दीप जलाये व विधि-विधान से भगवान विष्णु व श्री कृष्ण जी की पूजा कर सभी दीपों  को घर के हर एक स्थान पर रख दें और भोजन कर उपवास खोल ले।

शास्त्रों के अनुसार चैत्र माह की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को हनुमान जयंती मनाई जाती है पर कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को भी हनुमान जयंती मनाई जाती है। जिसके पीछे यह कारण है कि जब भगवान राम लंका पर विजय पाकर अयोध्या आये। तब मां सीता जी ने हनुमान जी को पहले तो अपने गले की माला पहनायी, जिसके बड़े-बड़े मोती व अनेक रत्न थे परंतु उसमें राम नाम न होने से हनुमान जी उससे (माला) संतुष्ट न हुये। तब सीताजी ने अपना सौभाग्य सिंदूर ललाट पर से लेकर हनुमान का लगाया और कहा अब मेरे पास कोई बहुमूल्य वस्तु नहीं है। तुम हर्ष के साथ इसे धारण करो और अजर-अमर रहो। यही कारण है कि कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को भी हनुमान महोत्सव मनाया जाता है और तेल-सिंदूर चढ़ाया जाता है। ऐसा करने से मनोकामना पूर्ण होती है।

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