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कालसर्प दोष नहीं सर्प दोष है ये

11-11-2017 Page : 1 / 1

कालसर्प दोष नहीं सर्प दोष है ये<br>

ज्योतिष शास्त्र के प्राचीन ग्रंथों में आचार्यों एवं दैवज्ञों ने कालसर्प योग के लिए स्पष्ट कोई निर्णय नहीं दिया है। अनिष्ट योगों के अन्तर्गत (1) काल योग (2) महाकाल योग (3) विष योग (4) वैदूषण योग (5) सर्प योग आदि का विवरण मिलता है। इन समस्त अनिष्ट योगों के सर्प योग का पर्याय माना जाता है। क्योंकि इनके फल काल सर्प के फल के समतुल्य दृष्टिगोचर होते हैं। अध्ययन के आधार पर तथा अनेकों कुण्डलियों का अनुभूतगम्य प्रयोग करने पर प्रमाणित होता है कि सर्प योग अपने में महत्वपूर्ण योग है। जिसका प्रभाव मानव-जीवन पर प्रत्यक्ष में दृष्टिगोचर होता है।
अनन्त सर्प योग-
    जब लग्नगत राहु और सप्तमस्थ हेतु हो और उन दोनों के बीच सूर्यदि सातों ग्रह स्थिति हो तो अनन्त काल सर्प योग होता है। इस योग में जन्म लेने वाला जातक स्वजनों से बार-बार धोखा खाता है। दिमाग से कम और दिल से अधिक काम लेता है। जन्म के साथ ही कई प्रकार संघर्षों का दौर शुरू हो जाता है। मध्य जीवन काल तक परेशानियां चलती हैं। जीवन की आजादी सीमित रहती है। मुख व मस्तिष्क में बीमारी पैदा होने का भय रहता है। इस योग के जातक किसी स्त्री के सहयोग से ऊपर उठते हैं और अन्य महिला की संगति से नीचे गिरते हैं, इनके जीवन का उत्तराद्र्ध भाग सामान्य रहता है।

- ज्योतिष मंथन

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