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संवत् 2074 का भविष्यफल।

28-03-2017 Page : 1 / 1

संवत् 2074 का भविष्यफल।

संवत् 2074 के संवत्सर का नाम `साधारण` है जिसका शास्त्रोक्त फल इस प्रकार है-
साधारणाब्दे वृष्ट्यद्र्धभयं साधारण स्मृतम्।
विवैरिणो धराधीशा: प्रजा:स्यु स्वच्छवेतस:।।

वर्षा औसत से आधी ही होगी। शासक व राजनेताओं में तालमेल बढ़ेगा।  मध्यम वर्षा से अन्न कम होगा। प्रजा में असंतोष व भय व्याप्त होगा परंतु फिर भी शांति रहेगी।
संवत्सर के स्वामी चंद्रमा हैं। किसी देश में बाढ़ तो कहीं सामान्य से कम वर्षा होगी। अल्प वर्षा के कारण सूखा पड़ेगा, जिसके कारण उत्पादन में कमी रहेगी और खपत बढ़ेगी।  लूट-पाट, हिंसा, चोरी, डकैती की घटनाओं से प्रजा परेशान रहेगी। राजनैतिक दलों में विरोधाभास बना रहेगा। केन्द्र में वैचारिक मतभेद व अशोभनीय वात्र्ता होगी, देश की रक्षा के लिये रक्षा सूत्रों पर खर्चें बढ़ेंगे।

संवत्सर वर्ष के अधिकारी
नव संवत्सर 2074 का वर्ष प्रवेश चैत्र शुक्ल प्रतिपदा मंगलवार को हो रहा है, इसलिए वर्ष के राजा मंगल होंगे। वर्ष के अन्य अधिकारी है- मंत्री-गुरु, सस्येश-सूर्य, धान्येश-शुक्र, मेघेश-बुध, रसेश-मंगल, नीरसेश-सूर्य, फलेश-बुध, धनेश-शनि और दुर्गेश-बुध

वर्ष के राजा मंगल का फल
वर्षा सामान्य से कम होने पर कहीं बाढ़ तो कहीं सूखा रहेगा। धान्य का उत्पादन कम होगा जिसके कारण धान्य के भावों में वृद्धि होगी। धान्य, गुड़, कपास, घी, कालीमिर्च, मसूर, शक्कर, लालमिर्च आदि के भावों में तेजी की सम्भावना रहेगी। व्यापारी वर्ग इस तेजी का लाभ उठा सकते हैं।
अपहरण, दुर्घटनाप, लूट-पाट व चोरी के मामले बढ़ सकते हैं। साथ ही हिंसा की घटनाओं में प्रजा को अनेक प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। नेताओंं में मतभेद और खींचतान के कारण राजनीतिक अस्थिर रहेगी।
प्रभावित क्षेत्र कश्मिर और अफगानिस्तान है।

वर्ष के मंत्री-गुरु का फल
सूर्य मेष राशि में दिनांक 14 अप्रैल 2017 को प्रवेश कर रहे हैं इसलिए गुरु इस वर्ष के मंत्री होंगे। देश के वित्त समाधान हेतु कई योजनाओं का निर्माण होगा। रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। समाज में धार्मिक गतिविधियाँ तेज होंगी। मेवा, फल व अन्न में मंदी रहेगी। शासक वर्ग प्रजा के हित में कार्य करेंगे। देश की अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होगी। रक्षा सूत्रों पर नये शोध होंगे।
प्रभावित क्षेत्र मालवा प्रांत है।

वर्ष के सस्येश- सूर्य का फल
इस संवत् में सूर्य 16 जुलाई, 2017 रविवार को कर्क राशि में प्रवेश कर रहे हैं, इसलिए सूर्यदेव वर्ष के सस्येश होंगे। मध्यम वर्षा होने से खरीफ की फसल सामान्य से कम होगी। कृषक वर्ग कृमि, कीट व वर्षा की अनियमित्ता से चिंतित रहेंगे। धान्य की उपज कम होगी, जिसके परिणामस्वरूप किमतों में तेजी आयेगी। रोग व चोरी की घटनाओं से प्रजा भयभीत रहेगी। कई देशों में युद्ध के आसार बनेंगे।
प्रभावित क्षेत्र विर्दभ और पोण्ड्र देश है।

वर्ष के धान्येश (शरद ऋतु की फसलों के स्वामी) शुक्र का फल-

इस वर्ष सूर्य धनु राशि में 16 दिसम्बर को प्रवेश कर रहे हैं इसलिए धान्येश शुक्र हैं। इस वर्ष गेहूं, जौ, सरसों और चावल का उत्पादन कम होगा। प्राकृतिक प्रकोप के कारण फसलों को नुकसान होगा। परिणामस्वरूप धान्य के भावों में तेजी आयेगी। मध्यम वर्षा के कारण चारे का उत्पादन प्रभावित होगा। गाय दूध कम देगी। तेल, घी के भाव बढ़ेंगे।
प्रभावित क्षेत्र नर्मदा नदी के तटवर्ती क्षेत्र तथा मध्यप्रदेश है।

वर्ष के मेघेश बुध का फल
इस वर्ष सूर्य आद्र्रा नक्षत्र में 21 जून, 2017 बुधवार को प्रवेश करेेंंगे, इसलिए वर्ष के मेघेश बुध हैं। वर्षा अधिक होगी। गेहूँ, जौ, चावल तथा तरल पदार्थों का उत्पादन बढ़ेगा। नहर, कूप, जलाशय आदि का निर्माण ग्रामीण क्षेत्रों में होगा, भू-भाग में सम्पन्नता बढ़ेगी।
प्रभावित क्षेत्र मगध है।

वर्ष के रसेश (रस पदार्थों के स्वामी) मंगल का फल

इस वर्ष सूर्य तुला राशि में 17 अक्टूबर मंगलवार को प्रवेश कर रहे हैं इसलिए रसेश मंगल हैं। वर्षा समान्य से कम होगी, रस पदार्थों में तेजी आयेगी। डीजल, पेट्रोल आदि ज्वलनशील पदार्थों, रत्नों व सुगंधित पदार्थों का व्यवाय लाभप्रद रहेगा। शक्कर, गुड़ आदि का उत्पादन घटेगा। राजनैतिक दलों में वेरभाव व स्वार्थ और प्रजा में असंतोष बढ़ेगा।
प्रभावित क्षेत्र कोंकण, गोआ है।

वर्ष के नीरसेश (धातु, वस्त्रादि के स्वामी) सूर्य का फल

इस वर्ष सूर्य मकर राशि में 14 जनवरी, 2018 रविवार को प्रवेश करेंगे इसलिए नीरसेश सूर्य होंगे। इस वर्ष जवाहरात, माणिक्य रत्न, तांबा, हीरा आदि खनीज पदार्थों के भावों में तेजी देखने को मिलेगी और धान, गुड़ व सरसों आदि की खपत उत्पादन से अधिक होने के कारण मूल्यों में बढ़ोत्तरी अधिक होगी।
प्रभावित क्षेत्र उज्जैन, इंदौर, मालवा आदि है।

वर्ष के फलेश (सम्पूर्ण फल व फूलों के स्वामी) बुध का फल

इस वर्ष सूर्य मीन राशि में 12 मार्च, 2018 बुधवार को प्रवेश करेंगे, इसलिए फलेश बुध होंगे। फलेश बुध होने के कारण फलों और फूलों के उत्पादन में बढ़ोत्तरी होगी। वर्षा समयानुकूल होगी। सरकार हरितक्रांति को बढ़ावा देगी और विकास व वृक्षारोपण के अभियान चलाये जायेंगे। पुष्प, फल व सब्जी आदि का उत्पाद बढ़ेगा।
फलेश का प्रभाव क्षेत्र सम्पूर्ण देश है।

वर्ष के धनेश शनि का फल (धन एवं कोष के स्वामी)

सूर्य कन्या राशि में 17 सितम्बर, 2017 को प्रवेश करेंगे इसलिए धनेश शनि होंगे। दैवीय आपदा से प्रजा पीडि़त होगी, राहत कार्य पर धन खर्च बढ़ेगा। शासक वर्ग व प्रजा को आर्थिक संकट  का सामना करना पड़ेगा, व्यापारी वर्ग को हानि होगी। राजनेता प्रजा के हित में कार्य न करके स्वयं के हित के लिये कार्य करेंगे। कृषिवर्ग को आर्थिक समस्या का सामना करना पड़ेगा।
धनेश का प्रभावक्षेत्र राजस्थान, मारवाड़ और बाड़मेर है।

वर्ष के दुर्गेश (रक्षा एवं सेना विभाग) बुध का फल

सूर्य सिंह राशि में 17 अगस्त 2017 को प्रवेश कर रहे हैं, अत: दुर्गेश बुध होंगे। संयुक्त राष्ट्र संघ विश्वशांति के लिये कड़े निर्णय लेगी। अपराध बढ़ेंगे और प्रजा को अशांति व कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।
दुर्गेश का प्रभाव क्षेत्र भी सम्पूर्ण देश होता है।

यद्यपि इन दशाधिकारियों का फल देश में सर्वत्र होता है, किन्तु राजा के विशेष फल का प्रभाव कश्मीर और अफगानिस्तान में और मंत्री का विशेष फल मालवा प्रांत में और अन्य अधिकारियों का विशेष प्रभाव उनके साथ उल्लेखित क्षेत्रों में होता है।

इस संवत की नववर्ष प्रवेश कुण्डली, जगत कुण्डली, आद्र्रा कुण्डली और सप्तनाड़ी चक्र आदि की भविष्यवाणियां पिछले अंक में दी जा चुकी हैं इसलिए यहां उनकी पुनरावृत्ति नहीं की जा रही है। संक्षेप में इस वर्ष रोहिणी का निवास तट पर बन रहा है और समय का वास धोबी के घर होने के कारण अच्छी वर्षा, पर्याप्त कृषि उत्पादन और प्रजा में सुख समृद्धि, विभिन्न प्रकार के व्यवसायों और उद्योगों में अधिक उत्पादन के कारण रोजगार के साधन बढऩे की संभावनाएं हैं और इससे सभी वर्ग के लोगों का जीवन स्तर उन्नत होगा।

- ज्योतिष मंथन, 28/03/2017

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