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मंगल दोष किसे प्रभावित करेगा वर या वधु को।

03-05-2017 Page : 1 / 1

मंगल दोष किसे प्रभावित करेगा वर या वधु को।

  1. यदि वर की कुण्डली में मंगल दोष है तथा कन्या की नहीं है तो वह दोष कन्या को प्रभावित करेगा।
  2. यदि वर की कुण्डली में शनि और मंगल दोनों मिलकर दोहरा दोष कर रहे हैं तथा कन्या की कुण्डली में केवल मंगल से यह दोष बन रहा है तो इसका अर्थ यह है कि इस दोष का पूरा समाधान नहीं हुआ है और कन्या का जीवन या स्वास्थ्य फिर भी प्रभावित हो सकता है।
  3. यदि किसी कारण से अपवाद स्वरूप मंगल दोष का निवारण हो गया है तब भी सावधानी बरतनी आवश्यक है। उदाहरण के लिए भगवान राम की कुण्डली में सप्तम भाव में उच्च के मंगल थे। परन्तु मंगल दोष का निवारण नहीं हुआ और उनका अपनी पत्नी से विछोह हुआ।
  4. इसी तरह से राहु मंगल के साथ हों तो मंगल दोष का निवारण माना गया है। परन्तु ध्यान रहे कि पाप ग्रहों के मूल संस्कार नष्ट नहीं होते, सीमित अवश्य हो सकते हैं, वे अपनी मूल प्रकृति का प्रदर्शन कभी न कभी करेंगे। एक अन्य किंवदंती है कि मंगल का दोष 28 वर्ष के बाद समाप्त हो जाता है। मैं इस तथ्य से पूरी तरह सहमत नहीं हूं। विवाह में देरी यदि मंगल के कारण है तो वह 28 के बाद आज्ञा दे देंगे क्योंकि उनकी नैसर्गिक आयु 28 वर्ष मानी गई है, परन्तु मंगल दोष का निवारण हो जाएगा ऐसा मानने का कोई प्रमाण नहीं है। आप जिन मामलों में वैधव्य आता ही है तो आप पाएंगे कि वह 28 वर्ष के बाद ही आता है पहले नहीं। प्राय: करके यह दोष अल्पायु की ऊपर वाली संधि रेखा पर प्रकट होता है अर्थात् 32 से 40 वर्ष के बीच में।
  5. मंगल दोष तब बहुत उग्र हो जाता है जब मंगल किसी अनष्टि भाव के स्वामी हैं और वक्री भी हों।
  6. मंगल दोष से युक्त व्यक्तियों को मैंने जीवन में बहुत अधिक उन्नति करते देखा है। उनमें जीवन के प्रति ललक, जिजीविषा, एग्रेशन, पहल करने की क्षमता, मारक क्षमता व तीव्र प्रतिक्रिया की क्षमता अन्य व्यक्तियों से बहुत अधिक होती है।
  7. वक्री मंगल नेतृत्व क्षमता देते हैं और दुस्साहस भी देते हैं। बृहस्पति यदि मंगल पर दृष्टिपात कर लें तो ऐसा व्यक्ति आखिरी क्षणों में समझौतावादी हो सकता है। यदि मंगल दोष का निवारण मिलता है तो विवाह अपेक्षा से जल्दी भी हो सकता है। देरी से विवाह का कारण केवल मंगल ही नहीं होते बहुत सारे अन्य कारण भी हो सकते हैं। लगभग सभी ज्योतिष ग्रंथों में उल्लेख है कि ग्रहों को शांत किया जा सकता है और ग्रहों का शांत होने का अर्थ यह है कि उनकी वजह से जो भी परिणाम आ रहे हैं उनमें सुधार आ जाए।

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