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मंगल दोष अनिष्टकारी होता है

20-07-2017 Page : 1 / 1

मंगल दोष अनिष्टकारी होता है

    खण्डन - ज्योतिष ग्रंथों में एक श्रोक मिलता है जिसके अनुसार जन्म पत्रिका की जन्म लग्न से बारहवें भाव, लग्न, चौथा भाव, सातवां भाव तथा आठवें भाव में मंगल ग्रह हों तो वैधव्य दोष उत्पन्न होता है। दक्षिण भारतीय पद्धतियों में दूसरे भाव के मंगल को भी अनिष्ट माना है। इस वैधव्य दोष को ही मंगल दोष कहा गया है।

    दो बातें एक साथ सत्य नहीं होतीं, यदि किसी की जन्म पत्रिका में आयु योग पूर्ण है तो उसकी जल्दी मृत्यु नहीं हो सकती। जिसकी जन्म पत्रिका में उपरोक्त वर्णन के अनुसार मंगल उपस्थित हों तो उसके जीवन साथी की मृत्यु हो जाती है, ऐसा कथन किया गया है। यदि आयु योग पूर्ण हो तो यह घटना कभी घटेगी ही नहीं। आधे से अधिक मामलों में लोगों की जन्म पत्रिका में मंगल दोष उपलब्ध रहता है। फिर ज्योतिष ग्रंथों में ही मंगल दोष के उपवाद या खण्डन भी बहुत सारे बताये गये हैं, जिसके कारण मंगल दोष का औसत प्रतिशत बहुत कम रह जाता है।

    मंगल दोष का अर्थ जीवनसाथी की मृत्यु ही नहीं है, बल्कि कई तरह के ऐसे कष्टों का वर्णन मिलता है, जिन्हें मृत्यु तुल्य कहा जा सकता है। परंतु ऐसा तो किसी न किसी ग्रह की दशा में आता  ही रहता है। ऐसा प्रतीत होता है कि मंगल दोष को बहुत अधिक बदनाम कर दिया गया है और कुछ ज्योतिषी पर्याप्त अध्ययन के बिना मंगल दोष की घोषणा कर देते हैं और कई बार यह धन-दोहन का साधन बन जाता है।

    क्या मंगल दोष 28 वर्ष के बाद समाप्त हो जाता है -
    यह सत्य नहीं है। इस तरह की भ्रांत धारण जनसाधारण में फैली हुई है। जन्म पत्रिका में मंगल जिस स्थान पर स्थित हैं, उसे कभी बदला नहीं जा सकता। मंगल के जो नैसर्गिक गुण हैं उनका प्रदर्शन तो जीवन भर होता रहेगा, वे परिणाम अच्छे भी हो सकते हैं और कुछ कठिन भी, परंतु यह सत्य नहीं है कि मंगल ग्रह अपना प्रभाव 28 वर्ष की आयु के बाद खो देते हैं।

    मंगल दोष से सफलता -
    अनुभव में देखा गया है कि जिसे मंगल दोष कहा गया है उससे प्रभावित व्यक्ति अत्यधिक सफलता प्राप्त कर रहे हैं। ऐसे व्यक्ति अधिक ऊर्जावान मिलते हैं और साहस के साथ समस्याओं का सामना करते हैं और आगे बढ़ जाते हैं। ऐसे व्यक्ति क्रांतिकारी सिद्ध होते हैं और उनमें अनुसंधान वृत्ति होती है। इनमें पहल करने की क्षमता होती है, इसलिये सफलता प्राप्त करते हैं। संसार में ऐसे असंख्य उदाहरण हैं। आमिर खान व ऐश्वर्या राय भी उनमें से हैं।

    पीपल विवाह, विष्णु विवाह व घट विवाह-
    मंगल दोष के निवारण के लिये वर या कन्या का पीपल से, घट से या विष्णु की मूर्ति से विवाह करा दिया जाता है। अगर वैधव्य दोष वाला योग अत्यंत कठिन है तो पीपल की मृत्यु हो जानी चाहिये परंतु अधिकांश मामलों में ऐसा नहीं होता। शास्त्रों में इस दोष का वर्णन है परंतु नादान ज्योतिषियों द्वारा धन-दोहन के उद्देश्य से इसे अतिरंजित करके बताया जा रहा है। भय उत्पन्न करके धन-दोहन की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। अगर मंगल दोष से पीडि़त वर या कन्या का विवाह पीपल से करा दिया जाता है तो उपरोक्त भ्रांत धारणा के कारण अब तक भारत के सारे पीपल वृक्ष मृत्यु को प्राप्त हो गये होते।

    सच यह है कि मंगल दोष का वर्णन शास्त्रों में मिलता है परंतु उन्हीं शास्त्रों में मंगल दोष का खण्डन भी बहुतायत में मिलता है। संसार में आधी जन्म पत्रिकाएं मंगल दोष से युक्त हैं। हर वर या कन्या को उसका उपयुक्त जीवनसाथी अवश्य मिलेगा। मन में भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है।

पं. सतीश शर्मा, 20/07/2017
मुख्य संपादक, ज्योतिष मंथन

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