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ज्योतिष में तुलसी का महत्व।

12-08-2017 Page : 1 / 1

ज्योतिष में तुलसी का महत्व।

कैसे करें तुलसी को ग्रहण
  • तुलसीपत्र बिना स्नान किए हुए नहीं तोड़ना चाहिए। ऐसा करना अपराध है तथा इससे पूजन कार्य सफल हो जाता है।
  • पूर्णिमा, अमावस्या, द्वादशी, रविवार, संक्रांति ( सूर्य का राशि में प्रवेश का दिन) के दिन, मध्यान्ह में तथा रात्रि में तुलसी नहीं तोड़नी चाहिए।
  • जन्म या मृत्यु के अशौच में,  अपवित्र समय या स्थिति में रात में पहने हुए बिना धुले वस्त्र पहनकर जो तुलसीपत्र ग्रहण करते हैं वह मानव श्री विष्णु के सिर का छेदन करते हैं कि बराबर दोष लगता है, क्योंकि तुलसीजी श्रीहरि के स्वरूप वाली ही है ।
  • तुलसी का चयन जूते पहनकर, पश्चिम की ओर मुख करके भी नहीं करना चाहिए एहसास वृहत धर्म पुराण का कथन है।
       रविवार आदि समय को छोड़कर ही तुलसीपत्र ग्रहण करना चाहिए। यदि अगले दिन रविवार पड़ता है तो शनिवार को ही ग्रहण कर लेना उचित होता है। अब यदि आवश्यकता में देव पूजा के लिए रविवार आदि समय में तुलसीपत्र ग्रहण करना पड़े तो निम्न मंत्र बोलकर ग्रहण करें।

 तुलसी हेम रूपाSसि कृष्णरुपेण मंजरी।
 शालिग्राम हितार्थाय मम्दोषों न दीयते।।

        इस मंत्र को बोलने से दोष मिट जाता है। पदम पुराण के अनुसार देवता के लिए तुलसीपत्र चयन, होम के लिए समिधा ग्रहण करना तथा गायों के लिए चारा लाने का दोष अमावस्या को नहीं लगता है।

     तुलसीदल 11 दिन तक बासी नहीं होता है। इतने दिनों तक चयन करने के पश्चात उससे देव , पितृकार्य संपन्न किए जा सकते हैं।

वास्तु में महत्व -  जिस घर में तुलसी का पौधा सम्मान के साथ पूजित होकर स्थित रहता है, उस घर की स्त्रियां कभी असाध्य रोगों से पीड़ित नहीं होती है। ऐसा पुराणों में वर्णन मिलता है।

गणपति पूजन में निषेध -  गणेश जी पर तुलसी दल नहीं चढ़ाना चाहिए क्योंकि मंत्रमहोदधि में कहा है -
विनायकी तू तुलसीमं नार्पयेत्  जातुचित् बुध:।

- पं. श्रीराम शर्मा, 12/08/2017

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