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यदि आपकी जन्मपत्रिका में पीड़ित है ये ग्रह तो आप हो सकते है इस रोग के शिकार।

07-07-2018 Page : 1 / 1

यदि आपकी जन्मपत्रिका में पीड़ित है ये ग्रह तो आप हो सकते है इस रोग के शिकार।

1.     सूर्य : अशुभ हो तो अग्रि से कष्ट, तेज बुखार, कमजोर पाचन शक्ति, क्षयरोग, अतिसार, हृदय विकार, राजा, देवता, ब्राह्मणो से कष्ट, मिर्गी, आँख का विकार, हड्डियों की बीमारी, सूर्य जब जलराशि में होकर पीडित हो तो दमा, पेचिस, गंजापन, चिडचिडा होना  चौपाये से भय, सर्प भय, त्वचा विकार आदि।

2.     चन्द्रमा : पीलिया, जलोधर, सूजाक, यौन रोग, निद्रा रोग, आलस्य, कफ, शीत-ज्वर, जल के जानवरों से भय, रक्त दोष, थकावट, साँस की बीमारी, दमा, मानसिक रोग, जल व जलीय जन्तुओं से कष्टï, स्त्रिीयों की मासिक धर्म संबंधी समस्या, स्तन की बीमारी, फेफडे की बीमारी आदि आदि।

3.    मंगल : अण्डकोष  वृद्घि, शस्य भय, अग्रि ग्रंथी रुकना (ग्लैण्डस् फूलना), व्रण, मज्जा विकार, विटामिन। प्रोटीन की कमी, खुजली, चमड़ी का खुरदरापन, राजा से भय, अग्रि, चोरों से भय, भाई, मित्र, पुत्र से कष्ट, रक्त स्राव, मासिक धर्म  समस्या, गर्भपात, कूबड, सिर में चोट, उच्च रक्तचाप आदि आदि।

4.    बुध : चर्म रोग, वायु जनित रोग, कुष्ठ रोग, मंदाग्रि, शूल, संग्रहणी, बहम करना, बुद्घि भम्र, स्मरण शक्ति के दोष, बुरे स्वप्र, खुजली, गूंगापन, मानसिक उन्माद, वाणी के विकार, कान, नाक, गले की बीमारी आदि आदि।

5.    वृहस्पति : पेट में फोडा / रसोली, अंतडियो का ज्वर, कफ रोग, कान के रोग, लीवर की बीमारी, मोटापे की समस्या, पाचन में गडबडी, जलोदर, सरकारी धन के मामले में कलंक आदि आदि।

6.    शुक्र : जननेन्द्रिय संबंधी बीमारी, वीर्य विकार, मधुमेह, रक्त की कमी से पीलापन, स्त्री जाति से कष्टï, यौन रोग, सूंघने की शक्ति कम होना, दृष्टि कमजोर होना, आँख में मोतिया, पथरी होना, अपेंडिक्स होना, लिकोरिया  आदि आदि।

7.    शनि : द्वारिद्य दोष, अपने कर्म/ पिशाच से क्लेश, जोड़ों में दर्द, श्रम से थकान, भ्रान्ति होना, काँख के रोग, शरीर के भीतर उष्णता, नौकरों से कष्ट, चिन्ता, हृदय-ताप, पेड या पत्थर से चोट, माँस पेशियाँ संबंधी दर्द, साँस की बीमारी, हिस्टीरिया, मिरगी, अल्सर आदि आदि।

8.    राहु : मिरगी, शीतला माता, बन्धन, संक्रामक रोग, नेत्र रोग, कृमि जनित रोग, भूत/पिशाच पीडा, चित्त भ्रम, जेल यात्रा, कुष्ठ रोग, कोढ, दुर्मति, विष का कारण बीमारी, मलेरिया, प्लेग, खुजली, हैजा, चेचक आदि आदि।

9.    केतु : खुजली, दाद, शत्रुकृत पीडा, अपनी आचारहीनता व नीच जाति से दु:ख, मानसिक कष्टï, आंत कीड़े चेचक, हैजा, संक्रामक रोग।

प्रत्येक ग्रहों से सम्बंधित बीमारी के लिए सम्बंधित ग्रहों के उपाय लाभदायक रहते है।

- ज्योतिष मंथन

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