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आपका विवाह शास्त्रों में वर्णित किस श्रेणी में आता है।

07-07-2018 Page : 1 / 1

आपका विवाह शास्त्रों में वर्णित किस श्रेणी में आता है।

हिन्दु धर्म में विवाह को सोलह संस्कारों में से सबसे अधिक महत्व दिया इसके पीछे ऋषियों के कई कारण रहे होंगे। आज कई मायनों में विवाह का महत्वा ही बदल गया है। आज से कुछ वर्षो पूर्व तक संतान का विवाह माता-पिता ही तय किया करते थे परन्तु आज जब तक लड़का-लड़की आपसे में एक दुसरे को जान न ले विवाह नहीं करते।
  • पैशाच विवाह: पैशाचश्चष्टमोऽधम: से प्रकट होता है कि यह विवाह निकृष्टतम प्रकार का था। मनीषियों के अनुसार सुप्त, मत्त अचेतन कन्या का बलात् हरण एवं भोग तथा विवाह इस श्रेणी में आता है यह अवांछित, असभ्य, बर्बर प्रकार या जो आदिम जाति के अतिरिक्त कहीं प्रचलित नहीं हुआ।
  • राक्षस विवाह: हिमालय एवं याज्ञवल्क्य स्पष्टतया इस विवाह को युद्ध से उद्भूत मानते हैं। रोती, पीटती कन्या का उसके संबंधियों को मारकर या क्षत-विक्षत कर बलपूर्वक हरण करना विवाह का राक्षस प्रकार है।
  • गान्धर्व विवाह: हिमालय की तराई में अवस्थित गंधर्व समुदाय द्वारा अंगीकृत यह विवाह प्रकार गान्धर्व कहलाता था और विशेषत: क्षत्रिय वर्ग में व्यवहत था यह आज प्रेम विवाह के रूप में विद्यमान है।
  • आसुर विवाह: जिस विवाह में पति कन्या तथा उसके संबंधियों को यथाशक्ति धन प्रदान कर स्वच्छन्दता पूर्वक कन्या से विवाह करता है। उसे आसुर विवाह कहते हैं।
  • प्राजापत्य विवाह: प्रजापति के प्रति ऋण चुकाने अर्थात् धर्माचरण सम्मत सन्तानोत्पत्ति हेतु जातक-जातिका वैवाहिक बंधन में आबद्ध होते थे।
  • आर्य विवाह: ऋषि परम्परा के पुरोहितों और यज्ञ प्रिय ब्राह्मणों में प्रचलित यह विवाह वर द्वारा कन्या के पिता को यज्ञादि धर्मसम्मत कार्य सम्पादन हेतु एक या दो गौ दान कर सम्पन्न होता है।
  • दैव विवाह: कन्या को वस्तु मानकर पिता द्वारा अपने ऋत्विज पुरोहित को कन्या दान करना दैव विवाह था।
  • ब्रह्म विवाह: सर्वाधिक प्रशस्त, शुद्ध, विकसित और सम्प्रति विवाह प्रकार ब्रह्म है।
                आज के परिपेक्ष्य में ब्रह्म विवाह और गन्धर्व सर्वाधिक देखे जा सकते हैं। विलम्ब विवाह सप्तमेश या सप्तम भाव पर पड़ रहे दुष्प्रभावों के परिणाम हैं। वैसे आज विवाह की उम्र 23 से 26 वर्ष तक सामान्य मानी जाती है। उम्र विशेष के बाद होने वाले विवाह विलम्ब विवाह की श्रेणी में आते हैं।
- ज्योतिष मंथन पत्रिका

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