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चमत्कारी नीम

16-10-2019 Page : 1 / 1

चमत्कारी नीम

पुराणों में नीम का वृक्ष अमृत तुल्य बताया गया है। नीम में सर्वत्र पाए जाने वाले त्रिदोष (वात, पित्त, कफ) को दूर करने वाली अपार क्षमता सम्मिलित है। नीम वृक्ष का पान्चांग (फल, फूल, पत्ते, जड़, छाल) रेशा-रेशा औषधि गुणों से भरपूर है। ऐसा बहुत ही कम वृक्षों में पाया जाता है, जो कि जड़ से शिखर तक उपयोगी हो। यह कोढ़, कफ नाशक, विष, त्वचा रोग, नेत्र रोग, रक्त विकार, दमा नाशक, बवासीर, दांतों के रोग, घाव, बुखार, आंखों में जलन, जलने पर, घमोरियाँ, जोड़ों के रोग, चेचक रोग, कील-मुहांसे, जहरवा, बालों में जुएं, जलोधर रोग, गंजापन, गठिया, खूनी दस्त, बलगमी खांसी, गले में जलन, सफेद कोढ़, कानों का बहना, कानों में सूजन, जहरीला विष, एक्जिमा आदि में अत्यन्त लाभकारी है। सभी औषधियों के फायदे व नुकसान दोनों पाए जाते हैं। ठीक उसी प्रकार नीम का वृक्ष औषधि के रूप में अमृत भी है तो इसके कुछ नुकसान भी देखने को मिलते हैं।
हर्निया - हर्निया रोग में नीम की ताजा पत्तियाँ और अमर बेल दोनों को बराबर मात्रा में लेकर गौमूत्र के साथ पीस लें और जिस स्थान पर हर्निया (अण्डकोष) है, पर इसका लेप कर लें। ऐसा सप्ताह में दो बार करने पर यह अत्यधिक फायदेमंद रहता है।

आंखों में जलन - नीम की पत्तियों का रस और पठामीलोद 10-10 पीसकर आंखों की पलकों पर लेप करें और 10 मिनिट बाद ठण्डे पानी से धो लें।

आंखों का दर्द - नीम की ताजा पत्तियों का रस निकाल कर कांच की शीशी में भर लें और सोते समय एक-एक बूंद आंखों में डालेंं। 10 साल से छोटे बच्चों के आंखों में न डालकर कानों में एक-एक बूंद डालेंं। यदि दायीं आंख दु:ख रही है तो बायें कान में और यदि बायीं आंख दु:ख रही है तो दायें कान में डालने से फायदा होता है।

कब्ज - प्रात:काल सूर्योदय से पूर्व कुल्ला करके नीम की नई-नई 5-6 पत्तियों को बारीक पीसकर गुनगुने पानी में मिलाकर पीने से कब्ज जल्दी की ठीक होती है।

एक्जिमा - नीम की छाल, मजीठ, पीपल की छाल को 10-10 ग्राम लेकर एक ग्लास पानी में उबालकर काढ़ा बना लें, उस काढ़े की दो चम्मच एक ग्लास पानी में मिलाकर सुबह-शाम लेने से एक्जिमा नष्ट हो जाता है।

कानों के कीड़े - नीम की पत्तियों का 25 ग्राम रस निकाल कर उसमें नमक मिलाकर हल्का गुनगुना कर लें और रूई को उसमें भिगोकर कान के पास 10 मिनिट के लिए उसे रख दें। यह क्रिया दिन में दो बार करें। ऐसा करने पर कान के कीड़े बाहर आ जाएंगे।

सफेद कोढ़ - नीम की पत्तियाँ व फूल और निम्बोली को बराबर मात्रा में लेकर-पीसकर छान लें। 40 दिन तक आधा-आधा ग्लास प्रात:काल इस रस का सेवन करें। ऐसा करने से सफेद कोढ़ दूर हो जाता है।

गले में जलन - पेट खराब होने के कारण गले में जलन पैदा हो जाती है। नीम की पत्तियाँ व निम्बोली को पीसकर इसका रस बना लें। इसका सुबह-शाम दो-दो चम्मच पानी में मिलाकर खाना खाने से पूर्व इसका सेवन करें।

गंजापन - आप किसी भी प्रकार का तेल बालों में लगाते हैं, उसमें नीम की पत्तियाँ डालकर गर्म कर लें। ठण्डा होने पर उसे छानकर किसी कांच की बोतल में रख लें और एक दिन छोड़कर एक दिन इस तेल की मालिश करने से 2-3 महीनों में ही बालों का आना शुरु हो जाता है।

गठिया - 25 ग्राम सरसों के तेल को गर्म कर लें। उसमें 10 ग्राम नीम की छाल डालकर गर्म होने दें, जब तक कि छाल जल नहीं जाए। उसे छानकर रख लें और उसे शरीर के जिस अंग पर गठिया है, उस स्थान पर थोड़ा गुनगुना करके मालिश करें व इसी तेल की सप्ताह में दो बार सब्जी बनाकर खाने से अत्यधिक लाभ प्राप्त होता है।

जलोधर - एक ग्लास पानी में 25 ग्राम नीम की छाल भिगो दें। 2 से 3 घंटे बाद उसे छानकर पी लें। आटे के अन्दर नीम की छाल का चूर्ण 10 ग्राम मिलाकर रोटियाँ बना लें और उसे घी में चुरकर खाने से जलोधर रोग नष्ट हो जाता है।

जहरवा - नीम का गोंद को सेक कर प्रतिदिन 2 ग्राम खाने से जहरवा नष्ट हो जाता है।

चेचक - नीम की ताजा-ताजा पत्तियाँ 7-8 ले लें। उनके साथ 5 काली मिर्च के दाने प्रतिदिन प्रात:काल सेवन करने से कुछ ही दिनों में चेचक रोग दूर हो जाता है। नीम और बहड़े के बीज तथा हल्दी को 5-5 ग्राम पीसकर ताजे पानी के साथ सेवन करें। ऐसा सप्ताह में एक बार करें। लगातार यह एक वर्ष तक करते हैं तो हमेशा के लिए चेचक रोग से मुक्ति मिल जाएगी।

सोरायसिस - नीम की पत्तियोंं को पानी में उबाल कर गुनगुना होने पर उसे पी लें और त्वचा पर नीम का तेल लगातार लगाते रहने से सोरायसिस जड़ से नष्ट हो जाता है।

त्वचा रोग - कभी-कभी मौसम में बदलाव होने पर त्वचा पर ऐलर्जी हो जाती है। प्रतिदिन नीम की नई-नई पत्तियों को खाने और सप्ताह में एक दिन बेसन में नीम की पत्तियाँ मिलाकर त्वचा पर लगाएं। ऐसा लगातार करने से त्चचा रोग से छूटकारा मिल जाता है।

घमोरियाँ - नीम के रस में नमक मिलाकर पीने से घमोरियाँ नष्ट हो जाती हैं तथा गर्मी, खुजली से भी राहत मिलती है।

घाव - नीम की पत्तियों का रस व सरसों का तेल लेकर इतना गर्म करे कि नीम का रस जल जाए। मात्र तेल बचने पर उस ठण्डा करके छान लें। यह तेल इतना गुणकारी है कि एलोपैथिक की दवा से भी ज्यादा असर करता है।

बलगमी खांसी - नीम की पत्तियों को जलाकर उसकी भस्म बना लें और भस्म को प्रतिदिन शहद के साथ चाटने से लाभ मिलता है। नीम की भस्म को सौंठ, अजवाइन, काली मिर्च और अदरक के रस में मिलाकर चाटने से तुरंत लाभ प्राप्त होता है। इस प्रयोग से श्वास नली की सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं।

जोड़ों का दर्द - नीम की पत्तियों का रस पानी में मिलाकर सोने से पहले पी लें व नीम के जड़ की छाल पीसकर उसका लेप करने से कमर के नीचले हिस्से का दर्द दूर हो जाता है।

मुंह की बदबू - नीम की निम्बोलियों का तेल बना रख लें और सप्ताह में एक-दो बार मंजन में एक-दो बूंद डालकर मंजन करने से दांतों के कीड़े व मुंह की बदबू दूर हो जाती है।

कनखजूरे का विष - नीम की पत्तियों को पीसकर उसमें सेंधा नमक मिला लें। जिस स्थान पर कनखजूरे ने काटा उस स्थान पर इसका लेप करने से विष का प्रभाव खत्म हो जाता है। यह प्रक्रिया दिन में दो बार करें।

खुजली - नीम व महंदी के पत्तों को एक साथ पीसकर रस निकाल लें। 25 ग्राम रस पानी में मिला लें। स्नान करने से पहले पानी में मिले रस को खुजली वाले स्थान पर लगा लें और जब यह सूख जाए तो स्नान कर लें और उसी रस को 25 ग्राम नारियल के तेल में मिला लें। स्नान के पश्चात् तेल को अपने शरीर पर लगाने से खुजली दूर हो जाती है।

वमन - 20 ग्राम नीम की पत्तियों को पीसकर आधे कप पानी में 5 ग्राम काली मिर्च मिलाकर पीने से वमन (उल्टी) से राहत मिलती है।

माथे में जुएं - जुएं होने पर नीम की पत्तियों व निम्बोलियों को जब तक कि वह पूर्ण रूप से जल नहीं जाए तब तक गर्म कर लें। ठण्डा होने पर इसे छान लें व सप्ताह में तीन बार प्रयोग करने से जुएं मर जाती है।

त्वचा के जल जाने पर - आग से जलने पर नीम की 50 ग्राम कच्ची-कच्ची पत्तियाँ व 250 ग्राम नारियल के तेल में गर्म कर लें। ठण्डा होने पर इस तेल को छानकर किसी कांच के पात्र में रख लें व जली हुई पत्तियों को भी पीस लें। इसे जले हुए स्थान पर लगाने व लेप करें।ध्यान रहे नीम के रस के प्रयोग में मात्रा का अवश्य ध्यान रखें व नवजात शिशुओं व गर्भवती स्त्रियों को नीम का सेवन कभी नहीं करना चाहिए।

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