होम : भविष्यवानियाँ :: श्री शैलपुत्री ।

श्री शैलपुत्री ।

22-09-2017

भगवान शंकर को यज्ञ भाग न मिलने के कारण सती ने दक्ष प्रजापति के यज्ञ में अपने आपको भस्म कर लिया। इन्होंने ही अगले जन्म में शैलपुत्री के रूप में जन्म लिया। शिव को पाने के लिए इन्होंने घोर तपस्या की। इनके दांये हाथ में त्रिशूल है और बांये हाथ में कमल है। ये वृषभ पर आरूढ़ हैं। आदि शक्ति श्री दुर्गा का प्रथम स्वरूप श्री शैलपुत्री हैं। पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण ये शैलपुत्री कहलाती हैं। नवरात्र के प्रथम दिन इनकी पूजा और आराधना की जाती है।

इस दिन साधक को अपना चित्त मूलाधार चक्र में स्थिर करके अपनी साधना प्रारंभ करनी चाहिए। श्री शैलपुत्री का महत्व और शक्ति अनन्त है। इनके पूजन से मूलाधार चक्र जाग्रत होता है, जिससे साधक को मूलाधार चक्र जाग्रत होने से प्राप्त होने वाली सिद्धियाँ स्वत: प्राप्त हो जाती हैं। इस देवी का पूजन करने वाली स्त्रियों को भगवान शिव जैसे पति की कामना रहती हैं और पुरुषों को भगवान शिव की कृपा की कामना रहती है।

Subscribe to NEWS and SPECIAL GIFT ATTRACTIVE

Corporate Consultancy
Jyotish Manthan
International Vastu Academy
Jyotish Praveen