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भ्रम - राहु अनिष्टकारी ग्रह हैं।

24-07-2017


राहु छाया एक ग्रह हैं यद्यपि उनका भौतिक अस्तित्व नहीं है और पौराणिक कथाओं के अनुसार इन्हें अमृत्व प्राप्त हैं, ब्रह्मा की सभा का बैठने के अधिकार प्राप्त है तथा इन्हें शाप और वरदान देने की शक्तियाँ प्राप्त हैं। किसी भी कर्मकाण्ड के समय गणेश जी, वरुण जी, पंचदेव और षोडश मातृकाओं के साथ-साथ नवग्रह मण्डल की भी स्थापना की जाती है। जो कुछ भी अर्पण किया जाता है, वह सभी ग्रहों को समान रूप से किया जाता है। ज्योतिष के अनुसार कभी-कभी सूर्य और बृहस्पति भी अनिष्ट भावों के स्वामी होने पर अशुभ परिणाम दे देते हैं तो अन्य ग्रह भी ऐेसे परिणाम दे ही सकते हैं। राहु की जब कृपा होती है तो अपनी महादशा में अनन्त लक्ष्मी और सम्पन्नता प्रदान कर देते हैं।

    ज्योतिष ग्रंथों में राहु का समीकरण सर्प से अधिक किया जाता है। सर्प या सर्प गति एक सांकेतिक भाषा है। वैष्णव परम्पराओं में भी सर्प को अत्यधिक सम्मान प्राप्त है और शैव परम्पराओं में भी सर्प को अत्यधिक सम्मान प्राप्त है। यह जानकर आश्चर्य होगा कि शैव व वैष्णवों में कभी गंभीर मेतभेद रहे हैं और दोनों एक -दूसरे के प्रति आक्रामक रहे हैं। तभी तो महान समन्वय कारक तुलसीदास जी को कहना पड़ा कि  ``शिव द्रोही मम दास कहावा, सो नर मोहि सपनेहु नहिं भावा``। राहु को कई बार माया का प्रतीक भी माना गया है। विभिन्न दार्शनिक चिंतनों से यह निष्कर्ष निकलता है कि ब्रह्मा द्वारा जगत की मानसी सृष्टि के क्रम में ब्रह्मा द्वारा जिस माया का प्रयोग किया गया उसका संबंध राहु से है। संसार के समस्त कण, इलेक्ट्रॉन से लेकर बड़े-बड़े ब्रह्माण्ड तक, अपने कक्षा वृत्त में वृत्तगति से दीर्घवृत्त गति में आ गये और उनका अपनी कक्षा में दोलन  सर्प गति के समान है।

    आधुनिक भारत में कई प्रधानमंत्री और बड़ा राजयोग प्राप्त करने वाले लोग राहु के प्रभाव में ही सफल हो पाये हैं। अब राजनैतिक जटिलताएं इतनी अधिक हो गयी हैं जिनमें षड्यंत्र, कुटिलता और घात-प्रतिघात की आवश्यकता पड़ती है। यह सब राहु के प्रिय विषय हैं और एक धारणा के अनुसार उच्चकोटि के राजयोग के लिये इन सब गुणों की भी आवश्यकता है। लौकिक समृद्धि के लिये लोग इन गुणों या दुर्गुणों को प्रयोग में लाते हैं। कोई भी ग्रह अपवाद नहीं है। बृहस्पति नैतिक मूल्यों के रक्षक हैं परंतु ज्योतिष गणना में यदि अनिष्ट भावों के स्वामी हुये तो व्यक्ति को दुराचारी बना देते हैं और उनका पतन करा देते हैं। इसी क्रम में यदि राहु ज्योतिष गणना के अनुसार शुभ ग्रह की श्रेणी में आ जाते हैं तो अनन्त ऐश्वर्य प्रदान करते हैं। यह देखा गया है कि राहु की महादशा में व्यक्ति गंगा स्नान अवश्य करता है।

    प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी व राजीव गांधी राहु दशा-अन्तर्दशा के प्रभाव में ही प्रधानमंत्री बने। नरेन्द्र मोदी जब प्रधानमंत्री बने, उस समय चंद्रमा की महादशा में राहु की अन्तर्दशा चल रही थी।
    अत: यह धारणा कि राहु दुष्ट ग्रह हैं उचित नहीं है। जब ज्योतिष गणना में वह शुभ सिद्ध होते हैं तो अनन्त ऐश्वर्य प्रदान करते हैं और कई बार कठिन साधना के मार्ग पर ले जाते देखे गये हैं।

पं. सतीश शर्मा
मुख्य संपादक, ज्योतिष मंथन

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