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श्री चन्द्रघण्टा।

22-09-2017

श्री दुर्गा का तृतीय स्वरूप श्री चन्द्रघण्टा है। इनके मस्तक पर घण्टे के आकार का अर्धचन्द्र है, इसी कारण इन्हें चन्द्रघण्टा देवी कहा जाता है। नवरात्र के तृतीय दिन इनका पूजन और अर्चन किया जाता है। इस दिन साधक को अपना चित्त मणिपूर चक्र पर स्थिर करके अपनी साधना करनी चाहिए।

श्री चन्द्रघण्टा के पूजन से साधक को मणिपुर चक्र के जाग्रत होने वाली सिद्धियाँ स्वत: प्राप्त हो जाती हैं। इनकी उपासना से हमें समस्त सांसारिक कष्टों से मुक्ति हो जाती है। सहज ही परमपद के अधिकारी बन सकते हैं। हमें निरन्तर उनके पवित्र विग्रह को ध्यान में रखते हुए साधना की ओर अग्रसर होने का प्रयत्न करना चाहिए। उनका ध्यान हमारे इहलोक और परलोक दोनों के लिये परम कल्याणकारी और सद्गति देने वाला है। इनके शरीर का रंग सोने के समान चमकीला है, इनके दस हाथ हैं, यह सिंह पर सवार हैं और युद्ध मुद्रा में खड्ग और अन्य अस्त्र-शस्त्र से विभूषित हैं। इनकी कृपा से अलौकिक वस्तुओं के दर्शन होते हैं।

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