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इन्टरनेशनल वास्तु एकेडेमी द्वारा पत्राचार कोर्स

इन्टरनेशनल वास्तु एकेडेमी द्वारा पत्राचार कोर्स
यह ऐसा पाठ्यक्रम है जिसमें सभी कोर्स मॉड्यूल एक के बाद एक डाक द्वारा भेजे जाते हैं और विद्यार्थियों को फील्ड प्रशिक्षण के लिये जयपुर मुख्यालय बुलाया जाता है। छ: माह बाद पांच दिन के लिए पहला चरण कराया जाता है जबकि पाठ्यक्रम के पूरा होने के बाद 10 दिन के लिए गहन प्रशिक्षण का अंतिम चरण कराया जाता है। इसके तुरन्त बाद परीक्षा ली जाती है। इस सत्र के दौरान ज्योतिष, वास्तु, फेंगशुई और संबंधित स्थापत्य में पाठ्यक्रम की तेजी से समीक्षा कराई जाती है जिसमें वास्तु स्थलों, वाणिज्यिक स्थानों, व्यवसाय केन्द्रों, उद्योगों, भवनों, मंदिरों, महलों और ऐतिहासिक स्थानों का भ्रमण कराया जाता है। अध्ययन के अन्तर्गत कस्बों में भी ले जाया जाता है। वैदिक विषयों जैसे - ज्योतिष, वास्तु, स्थापत्य स्थल, भूमि, कार्यस्थल, देवता, रहस्य, आश्चर्य, भविष्यवाणियाँ, गणनाएं, भाग्य, नियति, ग्रहों  की मुख्य और गौण दशाएं, तारे, खगोल विज्ञान, ब्रह्माण्ड, कर्म, भविष्यकथन, मानसिक भविष्यकथन, भावी फलकथन, वर्षा, भूकम्प, आर्थिक, वित्त और प्राकृतिक आपदाएं आदि से संबंधित मामलों में कार्यशाला पद्धति का आविष्कार किया गया है।
वास्तु अध्ययन में मुख्यत: घर, मकान, दुकान, मॉल्स, वाणिज्यिक स्थल, मंदिर, महल, किले, व्यापार, ऐतिहासिक भवन, कस्बा योजना, विकास रणनीति, धन कमाना, संपदा, स्वास्थ्य और मन की शांति आदि पर ध्यान दिया जाता है। कक्षा में अध्ययन के दौरान ज्योतिष से वास्तु संबंधी भविष्यवाणी करना एक विशेष विषय है जिसमें विशेष ज्ञान कराया जाता है।
इस पाठ्यक्रम के बाद विद्यार्थियों को फील्ड प्रेक्टिस करने की अनुमति दी जाती है। वास्तु अकादमी उन्हें एक पेशेवर या सलाहकार के रूप में स्थापित करने में सहयोग देता है। वास्तु अकादमी का प्रमाण पत्र विद्यार्थियों को जन-सामान्य के बीच प्रतिष्ठित करने में अहम भूमिका निभाता है।
अवधि    :    12 माह
शुल्क     :    50,000/-    विदेशियों के लिय डॉलर = 1200 (सदस्यता और परीक्षा शुल्क सहित)
भुगतान का तरीका :भुगतान www.astroblessings.com के माध्यम से देना होगा online या सीधे बैंक अकाउंट में नकद/ चैक/ डी.डी. जमा करा सकते हैं।
माध्यम    :    हिन्दी / अंग्रेजी
अध्ययन सामग्री: अकादमी द्वारा दी जाएगी।
परीक्षा योजना:

    भारत में :- संस्था में परीक्षा देनी होगी
    विदेश में : ई-मेल द्वारा।

परीक्षा हेतु पात्रता : 18 वर्ष से अधिक का होना चाहिए, कम से कम 10+2 पास हो।

कार्यक्रम के विशेष आकर्षण
    कार्यपत्र: दस पाठों के प्रत्येक सेट के साथ एक कार्यपत्र होता है। आपके कार्यपत्र के विश्लेषण से हम आपके गुण, दोषों का निरूपण करते हैं और तद्नुसार आपको मार्गदर्शन देते हैं।
    सहायता: यदि आपको इन पाठों में कोई कठिनाई आती है और आप अपनी जिज्ञासा शांत करना चाहते हैं तो आप दूसरे शनिवार को 2 से 4 बजे (भारतीय समय) के बीच हमारे विशेषज्ञों से सम्पर्क कर सकते हैं|
    फील्ड प्रशिक्षण: हमारे कार्यक्रम में यह महत्वपूर्ण आकर्षण है जो अन्य पत्राचार पाठ्यक्रमों में नहीं मिलता है। साथ ही  साथ यह हमारे कार्यक्रम का अनिवार्य पहलू है। छ: महीने व फिर 12 महीने के बाद के पूरे होने पर फील्ड प्रशिक्षण आयोजित करते हैं। इसमें केवल वास्तु स्थलों का भ्रमण ही नहीं कराया जाता अपितु महत्वपूर्ण व्याख्यान और व्यावहारिक विचार-विमर्श भी होता है।
    परीक्षा योजना: परीक्षाएं वर्ष के अन्त में आयोजित की जाती हैं। परीक्षाएं ठीक व्यवहारिक सत्रों के बाद आयोजित होती है।
    प्रोजेक्ट कार्य: आपको दो प्रोजेक्ट रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होंगी, एक ज्योतिष पर और दूसरी वास्तु पर। विषय आप स्वेच्छा से चुन सकते हैं और अध्ययन में विषय का समुचित उदाहरणों का समावेश होना चाहिए।
    माध्यम:  हिन्दी और अंग्रेजी।
    प्रमाण पत्र: प्रशिक्षण और परीक्षाओं के सफलतापूर्वक पूर्ण होने पर अकादमी मुख्यालय में आयोजित होने वाले दीक्षांत समारोह में प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएंगे। अभ्यार्थियों को इसकी सूचना दी जाएगी।

Course Curriculum

Astrology

आधारभूत ज्योतिष -  ग्रहों, भचक्र, राशियों, विभिन्न भावों में ग्रहों की स्थिति का अध्ययन।


ग्रह
  • ग्रहों और ग्रह स्वामियों का अध्ययन।
  • ग्रहों के नैसर्गिक गुण।
  • ग्रहों की उच्च, नीच और मूलत्रिकोण राशियाँ।
  • वक्रत्व और अस्तंगतता।
  • नक्षत्रों का अध्ययन।
  • ग्रहों की अवस्थाएं (मुदित, वृद्धादि)।
  • ग्रहों का परस्पर संबंध।
भचक्रीय राशियाँ
  • 12 भचक्रीय राशियों का वर्णन (तत्व, चिह्नादि)।
  • भचक्रीय राशियों के स्वामी और उसके गुणधर्म।
  • लग्न के रूप में भचक्रीय राशियाँ और चंद्र राशि।
  • लग्न और चंद्र राशि के व्यक्ति पर प्रभाव।
कुण्डली का ज्ञान
  • कुण्डली के 12 भावों का अध्ययन।
  • आपोक्लिम, त्रिषडाय, केन्द्र, त्रिकोण, पणकार।
  • कुण्डली के प्रत्येक भाव से संबंधित घटक।
  • योग कारक ग्रह, अयोग कारक ग्रह।
  • ग्रहों का स्वामित्व।
  • ग्रहों के गर्हित और नैसर्गिक गुण, धर्म।
  • ग्रहों के पहलू।
  • योग।
  • केन्द्राधिपत्य दोष।
  • दशा।
  • षड़बल।
खगोल विज्ञान -
  • आंतरिक और बाह्य ग्रह।
  • सायन और निरयण (सायन और निरायण भचक्र राशियाँ)
  • मानक समय, स्थानीय समय, सायन समय,ग्रीनविच समय, परिभाषाएं।
  • विषुव अयन।
  • चंद्रमा के पात बिन्दु।
  • ग्रहों की अस्तंगतता और वक्रत्व।
  • ग्रहण।
  • खगोलीय परिभाषाएं।
गोचर और मुहूर्त -
  • मुहूर्त।
  • मुहूर्त का महत्व और महत्वपूर्ण मुहूर्तों का निर्णयन।
  • व्यक्ति और सामान्य रूप से ग्रह संचार के परिणाम।
 फलकथन ज्योतिष -
  • विभिन्न भचक्रीय राशियों में ग्रहों परिणाम।
  • ग्रहों की विशेष स्थितियों में परिणाम (उच्च, नीच, अस्त, वक्री)।
  • दृष्टियों के परिणामों को समझना।
  • वर्ग कुण्डलियाँ।
  • जन्म कुण्डली को गोचर से समन्वित करना।
  • विनिर्धारण में दशा अनुप्रयोग।
  • उपाय, रत्न विज्ञान समाधान।
विविध-
  • अष्टक वर्ग।
  • गुण मिलान।

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