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इन्टरनेशनल वास्तु एकेडेमी द्वारा नियमित कोर्स

इन्टरनेशनल वास्तु एकेडेमी द्वारा नियमित कोर्स
यह एक वर्ष का पाठ्यक्रम है जो मुख्यत: इंटरनेशनल वास्तु अकादमी (आई.वी.ए.) के मुख्यालय में संचालित होता है।
विद्यार्थी इस पाठ्यक्रम में ज्योतिष, वास्तु और फेंगशुई पर गहन शिक्षण लेंगे और उन्हें वास्तु से संबंधित थोड़ी बहुत स्थापत्य की जानकारी भी कराई जाएंगी। यहां विद्यार्थियों के भाग्य का निर्माण अन्तर्राष्ट्रीय शिक्षकों और सलाहकारों द्वारा संवारा जाता है जो कक्षाओं में अपने अनुभवों की जानकारी देते हैं।
वैदिक विषय जैसे - ज्योतिष, वास्तु, स्थापत्य, स्थल, भूमि, कार्यस्थल, देवता, रहस्य, आश्चर्य, भविष्यवाणियां, गणनाएं, भाग्य, नियति, ग्रहों  की मुख्य और गौण दशाएं, तारे, खगोल विज्ञान, ब्रह्माण्ड, कर्म, भविष्यकथन, मानसिक भविष्यकथन, भावी फलकथन, वर्षा, भूकम्प, आर्थिक, वित्त और प्राकृतिक आपदाएं आदि से संबंधित विषयों पर कार्यशाला पद्धति का विकास किया गया है।
वास्तु अध्ययन में मुख्यत: घर, भवन, दुकान, मॉल्स, वाणिज्यिक स्थल, मंदिर, महल, किले, व्यापार, ऐतिहासिक भवन, कस्बा योजना, विकास रणनीति, धन कमाना, संपदा, स्वास्थ्य और मन की शांति आदि पर ध्यान दिया जाता है।
कक्षा में अध्ययन के दौरान ज्योतिष से वास्तु संबंधी भविष्यवाणी करना एक विशेष विषय है जिसमें प्रसिद्ध विधानों का ज्ञान कराया जाता है।
वास्तु पर व्यावहारिक रूप से विशेष सत्र होता है जिसमें भूमि क्रय, भूमि विकास, भूमि में विनिवेश, भूमि उपयोग, भूमि पर ऋण, भूमि विकासकर्ता , भूमि विनिवेशिता, वृहत् भवन, वृहत् स्थापत्य, स्थाई सम्पत्ति (रियल एस्टेट), भवन संरक्षण और आर्किटेक्ट्स, ब्रोकर, रियल एस्टेट एजेन्ट, विक्रय, विनिवेश आदि का व्यवहारिक ज्ञान कराया जाता है और जो विकास, संपदा नियोजन, संपदा प्रबंधन, भू प्रबंधन और ऋण को सम्पत्ति में बदलना चाहते हैं, उन्हें व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया जाता है।
यह प्रशिक्षण विद्यार्थी को सफल पेशेवर या सलाहकार के रूप में सक्षम बनाता है, जिससे वह पर्याप्त धन अर्जित करने लगता है।
अवधि    :    12 माह
माध्यम    :    हिन्दी और अंग्रेजी
अध्ययन सामग्री: अकादमी द्वारा दी जायेगी।
परीक्षा योजना:    परीक्षाएं दो बार आयोजित होंगी।
पाठ्यक्रम शुल्क:
  1. पहली किस्त Rs. 50,000/- ( रजिस्ट्रेशन के समय )
  2. दूसरी किस्त  Rs. 50,000/- (6 माह बाद)
  3. तीसरी किस्त Rs. 50,000/- (9 माह बाद)
विदेशी अभ्यार्थियों के लिए : 2700 डॉलर ( दो किस्तों में )

Course Curriculum

Astrology

आधारभूत ज्योतिष -  ग्रहों, भचक्र, राशियों, विभिन्न भावों में ग्रहों की स्थिति का अध्ययन।


ग्रह
  • ग्रहों और ग्रह स्वामियों का अध्ययन।
  • ग्रहों के नैसर्गिक गुण।
  • ग्रहों की उच्च, नीच और मूलत्रिकोण राशियाँ।
  • वक्रत्व और अस्तंगतता।
  • नक्षत्रों का अध्ययन।
  • ग्रहों की अवस्थाएं (मुदित, वृद्धादि)।
  • ग्रहों का परस्पर संबंध।
भचक्रीय राशियाँ
  • 12 भचक्रीय राशियों का वर्णन (तत्व, चिह्नादि)।
  • भचक्रीय राशियों के स्वामी और उसके गुणधर्म।
  • लग्न के रूप में भचक्रीय राशियाँ और चंद्र राशि।
  • लग्न और चंद्र राशि के व्यक्ति पर प्रभाव।
कुण्डली का ज्ञान
  • कुण्डली के 12 भावों का अध्ययन।
  • आपोक्लिम, त्रिषडाय, केन्द्र, त्रिकोण, पणकार।
  • कुण्डली के प्रत्येक भाव से संबंधित घटक।
  • योग कारक ग्रह, अयोग कारक ग्रह।
  • ग्रहों का स्वामित्व।
  • ग्रहों के गर्हित और नैसर्गिक गुण, धर्म।
  • ग्रहों के पहलू।
  • योग।
  • केन्द्राधिपत्य दोष।
  • दशा।
  • षड़बल।
खगोल विज्ञान -
  • आंतरिक और बाह्य ग्रह।
  • सायन और निरयण (सायन और निरायण भचक्र राशियाँ)
  • मानक समय, स्थानीय समय, सायन समय,ग्रीनविच समय, परिभाषाएं।
  • विषुव अयन।
  • चंद्रमा के पात बिन्दु।
  • ग्रहों की अस्तंगतता और वक्रत्व।
  • ग्रहण।
  • खगोलीय परिभाषाएं।
गोचर और मुहूर्त -
  • मुहूर्त।
  • मुहूर्त का महत्व और महत्वपूर्ण मुहूर्तों का निर्णयन।
  • व्यक्ति और सामान्य रूप से ग्रह संचार के परिणाम।
 फलकथन ज्योतिष -
  • विभिन्न भचक्रीय राशियों में ग्रहों परिणाम।
  • ग्रहों की विशेष स्थितियों में परिणाम (उच्च, नीच, अस्त, वक्री)।
  • दृष्टियों के परिणामों को समझना।
  • वर्ग कुण्डलियाँ।
  • जन्म कुण्डली को गोचर से समन्वित करना।
  • विनिर्धारण में दशा अनुप्रयोग।
  • उपाय, रत्न विज्ञान समाधान।
विविध-
  • अष्टक वर्ग।
  • गुण मिलान।

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